Book authentic, priest-guided pujas at some of Bihar’s most revered temples, performed according to traditional Vedic rituals.
Discover the rich heritage of Bihar’s ancient temples Learn their history, legends, and spiritual significance Book authentic, scripture-based pujas and rituals
फाल्गु नदी के तट पर स्थित विष्णुपद मंदिर का निर्माण 1787 में रानी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था। तीन ओर चट्टानों और एक ओर नदी से घिरा यह पावन स्थल गया जी में स्थित है, जिसका उल्लेख रामायण–महाभारत में मिलता है। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है।
बाबा हरिहरनाथ शिवलिंग विश्व का एकमात्र शिवालय है, जहाँ एक ही गर्भगृह में आधे भाग में शिव और शेष में विष्णु विराजमान हैं। मान्यता है कि इसकी स्थापना ब्रह्मा ने शैव–वैष्णव एकता हेतु की। गज-ग्राह कथा इसका प्रमाण है। कार्तिक पूर्णिमा पर यहाँ शैव, वैष्णव व शाक्त संप्रदाय एक साथ स्नान व जलाभिषेक करते हैं।
माँ थावेवाली का मंदिर बिहार के गोपालगंज जिले के थावे में स्थित एक प्रमुख शक्तिस्थल है। मान्यता है कि माँ अपने परम भक्त राहु भगत की प्रार्थना पर कामरूप, असम से यहाँ प्रकट हुईं। सिंहासिनी देवी के नाम से प्रसिद्ध यह स्थान चैत्र माह में लगने वाले मेले व गहरी आस्था के लिए जाना जाता है।
देव सूर्य मंदिर, बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित, भगवान सूर्य को समर्पित प्राचीन और पावन स्थल है। यहाँ सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पूजा होती है। छठ पूजा के दौरान यहाँ सबसे अधिक श्रद्धालु आते हैं। यह बिहार के प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में से एक है।
कैमूर पहाड़ियों में स्थित माँ मुंडेश्वरी देवी मंदिर विश्व का सबसे प्राचीन क्रियाशील मंदिर माना जाता है, जहाँ सदियों से पूजा निरंतर होती आ रही है। 108 ई. का यह नागर शैली मंदिर शिव और शक्ति को समर्पित है तथा रामनवमी और शिवरात्रि पर विशेष श्रद्धा का केंद्र बनता है।
माँ तारा सासाराम में विंध्य पर्वत श्रृंखला की कैमूर पहाड़ियों की एक प्राकृतिक गुफा में स्थित हैं। तांत्रिक ग्रंथों के अनुसार माँ की चार भुजाएँ हैं—दाएँ हाथ में खड्ग व कैंची, बाएँ में कपाल व कमल। यहाँ गुप्तकालीन प्रतिमाएँ और 12वीं शताब्दी का शिलालेख माँ ताराचंडी की प्राचीन ख्याति दर्शाता है।
कैमूर की पहाड़ियों और घने जंगलों में स्थित गुप्ताधाम भगवान शिव को समर्पित पावन तीर्थ है। यहाँ स्वयंभू शिवलिंग विराजमान हैं। सच्चे मन से की गई प्रार्थना फलित होती है। सावन में श्रद्धालु कठिन यात्रा कर बाबा भोलेनाथ के दर्शन हेतु आते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति अनुभव देती है ही।
सुपौल के धरहरा गाँव में स्थित भीमशंकर मंदिर, जहाँ पांडवों के समय से चली आ रही आस्था आज भी जीवित है। मान्यता है कि पांडु पुत्र भीम ने यहाँ पूजा की थी। आइए, इस पौराणिक और दिव्य धाम की आध्यात्मिक महिमा को प्रत्यक्ष रूप से महसूस करें और श्रद्धा के साथ दर्शन करें।